Thursday, April 1, 2010
पेंटिंग परद्शनी का आयोजन
कुरुक्षेत्र मे रोडवेज कि हडताल का पुरा असर
केयू के युवा एवं सास्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर को अखिल भारतीय यूनिवर्सिटी संघ की इंटर यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय सांस्कृतिक बोर्ड का विशेष आमंत्रित स
केयू के युवा एवं सास्कृतिक विभाग के निदेशक अनूप लाठर को अखिल भारतीय यूनिवर्सिटी संघ की इंटर यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय सांस्कृतिक बोर्ड का विशेष आमंत्रित सदस्य मनोनीत किया गया है। पूरे भारत से इस बोर्ड के लिए युवा एवं सांस्कृतिक कार्यों के विशेषज्ञ के रूप में कुल पांच लोगों का चयन हुआ है। उनका मनोनयन एआईयू के अध्यक्ष डा. एमडी तिवारी ने किया है। अनूप लाठर ने बताया कि छह अप्रैल को इंटर यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय सांस्कृतिक बोर्ड की बैठक ग्वालियर के लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन में होगी। बैठक में विभिन्न मामलों पर चर्चा होगी। इसमें केयू, कुरुक्षेत्र तथा मैसूर यूनिवर्सिटी में वर्ष 2009-2010 के दौरान आयोजित उत्तर एवं दक्षिण क्षेत्रीय युवा महोत्सवों के दौरान प्रो. बीना शाह के साथ बैठकों में विभिन्न यूनिवर्सिटी के सांस्कृतिक समन्वयकों द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कुछ यूनिवर्सिटी तो वेटेज देती हैं, जबकि कुछ नहीं। इस बैठक में देश कीसभी यूनिवर्सिटी में इसे लागू करवाने पर भी विचार होगा। इसके साथ ही नवंबर 2010 में बांग्लादेश की ढाका स्थित ब्राक यूनिवर्सिटी में होने वाले सार्क देशों के पांच दिवसीय एसएयू फेस्ट को लेकर भी चर्चा होगी। इसके अलावा भारत की भागीदारी संबंधी विषयों पर फैसले लिए जाएंगे।हरियाणवी आरकेस्ट्रा की तरह अब सांग भी अखिल भारतीय विश्वविद्यालय संघ की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए तैयार है। अनूप लाठर ने बताया कि इस बार बैठक में उनका प्रयास रहेगा कि जिस प्रकार सांग को अपनी यूनिवर्सिटी की प्रतियोगिताओं का अहम हिस्सा बनाया है, उसी तरह प्रत्येक प्रदेश का लोकनाट्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले। इस प्रकार सांग को आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं में शामिल करवाने का भरसक प्रयास किया जाएगा।
Sunday, March 21, 2010
अग्रसेन पब्लिक स्कूल के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रतियोगिता के इस दौर में क्वालिटी एजुकेशन देने के लिए शिक्षण संस्थानों का कर्तव्य और भी बढ़ जाता है। बच्चों के व्यक्तिगत विकास में माता-पिता से अधिक शिक्षक का योगदान होता है। इसलिए परीक्षा के दिनों में बच्चों पर होने वाले तनाव से शिक्षक ही उबार सकते है। हमें बच्चों को इस प्रकार की शिक्षा प्रदान करनी चाहिए, जिससे बच्चों को शिक्षा बोझ न लगकर रूचिकर लगे। उन्होंने बच्चों के स्वर्णिम भविष्य की कामना के साथ स्कूल प्रबंधक कमेटी की प्रशसा करते हुए कहा कि यह शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है।
इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य ईश्वर सिंह ने कहा कि शिक्षा एक अमूल्य रत्न है, जिसे भाग्यशाली लोग ही प्राप्त कर पाते हैं। वे माता-पिता भाग्यशाली है, जिनकी पहचान उनके बच्चों से होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का कर्तव्य बनता है कि वे बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा का ज्ञान भी दें।
समारोह में स्कूली बच्चों द्वारा राजस्थानी लोक नृत्य, फ्लेमिंगो डांस, कोरियोग्राफी, भंगड़ा, आरकेस्ट्रा तथा कृष्ण नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात मुख्यातिथि ने शैक्षणिक उपलब्धियों में अव्वल रहे विद्यार्थियों को विपिन मनचंदा मेमोरियल अवार्ड व मनमोहन सिंघल मेमोरियल अवार्ड से पुरस्कृत किया।
इससे पहले अग्रसेन पब्लिक स्कूल प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने धर्मक्षेत्र व ऐतिहासिक स्थली पर पंहुचने पर मुख्यातिथि का स्वागत किया तथा स्कूल द्वारा चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों से अवगत करवाया। कार्यक्रम में स्कूल प्रबंधन कमेटी के उपाध्यक्ष विश्वपाल गोयल व अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे। कमेटी के प्रबंधक ईश्वर चंद गोयल ने मुख्यातिथि समेत अन्य अतिथियों का आभार जताया।
Tuesday, March 16, 2010
भारत की 52 शक्ति पीठों में से एक शक्ति पीठ हरियाणा ka शक्ति पीठ भद्रकाली
शक्ति पीठ भद्रकाली के पीठ अध्यअक्ष पंडित सत्पाल शर्मा ने बताया की देश भर में नवरात्रि पर्व बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है, भारत की 52 शक्ति पीठों में से एक शक्ति पीठ हरियाणा की धर्म नगरी कुरुक्षेत्र में है जहाँ पर नवरात्रों में शर्धालुओं की भारी भीड़ रहती है, पौराणिक कथाओं के अनुसार यहाँ देव आदि देव भगवान् शिव की पत्नी सती के दाये पैर का टखना गिरा था यह देश की 52 शक्ति पीठो में से एक है कुरुक्षेत्र धर्म भूमि पर यह पुराणिक शक्ति पीठ भद्रकाली के नाम से विख्यात है महाभारत के युद्ध से पूर्व पांडवो ने इसी शक्ति पीठ में आराधना करके विजय की कामना की थी, महाभारत युद्ध के बाद भगवान् श्री कृष्ण ने सबसे सुंदर घोडों की जोड़ी इसी मन्दिर में चढाई थी, प्रचलित कथाओं के अनुसार बाल्य काल में भगवान् श्री कृष्ण का मुंडन सस्कार भी इसी शक्ति पीठ में हुआ था, पौराणिक कथाओं के अनुसार सती दक्ष प्रजापति की पुत्री और भगवान शंकर की पत्नी थी, एक बार दक्ष प्रजापति ने हरिद्वार के पास कनखल में गंगा के तट पर ब्रहस्पति स्व यज्ञ का आयोजन किया दक्ष प्रजापति ने सभी देवी देवताओ को यज्ञ में आमित्रित किया लेकिन देव आदि देव भगवान शंकर को यज्ञ का निमत्रण नही भेजा इस बात से खिन सती अपने पति का तिरस्कार सहन नही कर पाई और तिरस्कार का कारण जानने के लिए यज्ञ स्थल पर पहुच गई गुस्से से भरी सती हवन कुण्ड में कूद पड़ी. देव आदि देव भगवान शंकर को सती के हवन कुण्ड में कूदने का पता चला तो वह यज्ञ स्थल पर पहुंचें और आपनी योग शक्ति से सती को हवन कुण्ड से निकाल लिया. मोह वश कंधे पर सती के शव को उठा कर ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने लगे देव आदि देव का मोह भंग करने के लिए भगवान् विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शव के टुकड़े टुकड़े कर डाले. वामन पुराण के अनुसार जहाँ- जहाँ सती के शरीर के टुकड़े गिरे उन स्थनो को शक्ति पीठ कहा गया. कुरुक्षेत्र के इस स्थान पर सती के दाए पैर का टखना गिरा था जिसे शक्ति पीठ के नाम से जाना जाता है. वही श्रद्धालु कलावती ने बताया की वह यह कई वर्षो से आ रही हे ओर यह आने से मनो कामना पुरी होती हे
